नया भारत क्या वास्तव में बदला भी है,या झूठे बदलाव के साथ चल रहा हे?विपक्ष और सत्तापक्ष में छिड़ी बहस में क्या अंतर नजर आता हे आओ जाने
इंटरनेट और सोशल मीडिया पर भारतीयों के देखे जाने की रुचि (Viewership/Consumption Trends) के अनुसार 'नया भारत' डिजिटल रूप से पूरी तरह बदल चुका है। पारंपरिक टीवी और प्रिंट मीडिया के मुकाबले अब देश की अधिकांश आबादी अपनी दैनिक जानकारी, मनोरंजन और वित्तीय जरूरतों के लिए पूरी तरह ऑनलाइन हो चुकी है।नेट देखे जाने की बदलती रुचि और व्यवहार के आधार पर आए मुख्य बदलाव इस प्रकार हैं:1. टीवी स्क्रीन से 'स्मार्ट स्क्रीन' का सफरस्मार्ट टीवी और ओटीटी की मांग: भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) के अनुसार भारत में टीवी देखने का तरीका तेजी से बदला है। पारंपरिक केबल कनेक्शन के बजाय लोग अब स्मार्ट टीवी और इंटरनेट-आधारित ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स पर अपनी पसंद का कंटेंट देख रहे हैं।रील्स और शॉर्ट वीडियो की लत: यूट्यूब शॉर्ट्स और इंस्टाग्राम रील्स जैसे वर्टिकल शॉर्ट-फॉर्म वीडियो प्रारूपों को देखने में भारतीय सबसे आगे हैं, जिसने आम जनता के कंटेंट कंजम्पशन के समय को काफी बढ़ा दिया है।2. समाचारों के लिए मुख्यधारा टीवी चैनलों से दूरीडिजिटल और स्वतंत्र पत्रकारिता: टीवी पर कुल कंटेंट में से समाचारों की हिस्सेदारी घटकर मात्र 7% रह गई है। अब लोग टीआरपी आधारित टीवी चैनलों के बजाय यूट्यूब समाचार चैनलों और डिजिटल क्रिएटर्स पर भरोसा कर रहे हैं। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में क्षेत्रीय स्वतंत्र यूट्यूब पत्रकारों को मिल रहे करोड़ों व्यूज इसका सबसे बड़ा प्रमाण हैं।3. केवल मनोरंजन नहीं, डिजिटल गवर्नेंस में रुचिडिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर: भारतीय यूजर्स की रुचि अब केवल इंटरनेट सर्फिंग तक सीमित नहीं है। सरकारी सेवाओं के ऑनलाइन होने से लोग UPI लेनदेन, डिजीलॉकर (जिसके 70 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं) और सरकारी योजनाओं की जानकारी सीधे इंटरनेट पर खोज और देख रहे हैं। 106 करोड़ से अधिक ब्रॉडबैंड ग्राहकों के साथ वित्तीय और तकनीकी साक्षरता काफी बढ़ी है।4. पारंपरिक शिक्षा बनाम ऑनलाइन लर्निंगई-लर्निंग की ओर झुकाव: अब शिक्षा केवल क्लासरूम तक सीमित नहीं है। Coursera, edX और विभिन्न यूट्यूब चैनलों के माध्यम से कौशल विकास (Skill Development) और ऑनलाइन कोर्सेज देखने की रुचि भारतीय युवाओं में तेजी से बढ़ी है।5. स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं की बाढ़स्थानीय कंटेंट (Hyper-local Content): इंटरनेट पर अब अंग्रेजी या शुद्ध हिंदी का दबदबा कम हुआ है। नेट पर भोजपुरी, तमिल, तेलुगु, पंजाबी और मराठी जैसी क्षेत्रीय भाषाओं के व्लॉग्स, पॉडकास्ट और मनोरंजन से जुड़े कंटेंट को देखने की रुचि अभूतपूर्व रूप से बढ़ी है, जिससे ग्रामीण भारत तेजी से मुख्यधारा से जुड़ रहा है।संक्षेप में कहें तो, नया भारत अब केवल "कंटेंट देखने वाला" उपभोक्ता नहीं रहा, बल्कि वह डिजिटल सेवाओं और अपनी क्षेत्रीय पहचान से जुड़े कंटेंट को चुन-चुनकर देखने वाला एक जागरूक और आधुनिक स्मार्ट यूजर बन चुका है।Scroll.inदर्शकों की बदलती रुचि और केंद्र सरकार द्वारा ऑनलाइन समाचारों पर ...अनुवाद किया गया — टीवी पर देखे जाने वाले कुल कंटेंट में समाचारों की हिस्सेदारी केवल 7% है और अधिक दर्शक शो और क्लिप ऑनलाइन देख रहे हैं, ऐसे में टीआरपी का महत्व कम होता जा रहा है।...
डिजिटल इंडिया और भारतनेट (BharatNet) की बदौलत देश में इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं का परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। सरकारी आंकड़ों (TRAI, PIB और डिजिटल इंडिया रिपोर्ट्स) के अनुसार, भारत में इंटरनेट क्रांति से जुड़े मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:
✍️ इंटरनेट और कनेक्टिविटी के आंकड़े
यूज़र्स की संख्या: 2014 में जहाँ देश में लगभग 25.15 करोड़ इंटरनेट यूज़र्स थे, वहीं 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 109 करोड़ (1.09 बिलियन) से अधिक हो गया है।
ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर: देश में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों की संख्या 106.58 करोड़ के पार पहुँच गई है।
डेटा की खपत: भारत में औसतन प्रति व्यक्ति मोबाइल डेटा खपत 19-20 GB प्रति माह से अधिक है, जो दुनिया में सबसे सस्ते और सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले डेटा नेटवर्क में से एक है।
भारतनेट: ग्रामीण भारत में इंटरनेट
गांवों तक इंटरनेट पहुँचाने के लिए शुरू किए गए भारतनेट प्रोजेक्ट ने जमीनी स्तर पर बड़ा बदलाव किया है:
ग्राम पंचायतें कनेक्टेड: देश की 2.21 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को डिजिटल सेवाओं के लिए 'सर्विस रेडी' बनाया जा चुका है।
ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC): ग्रामीण इलाकों तक हाई-स्पीड कनेक्टिविटी पहुँचाने के लिए 7 लाख किलोमीटर से अधिक ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा चुकी है।
डिजिटल इकोनॉमी और UPI
वैश्विक लेनदेन में दबदबा: भारत दुनिया के कुल रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट्स का लगभग 49% हिस्सा अकेले प्रोसेस करता है।
UPI की रफ्तार: वित्तीय वर्ष 2025-26 में UPI से 24,100 करोड़ से अधिक लेनदेन दर्ज किए गए।
डीबीटी (Direct Benefit Transfer): जन धन, आधार और मोबाइल (JAM) की तिकड़ी के जरिए 51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी सब्सिडी और सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में बिना बिचौलियों के ट्रांसफर की गई है।
ई-गवर्नेंस और डिजिटल सेवाएं
डिजिलॉकर (DigiLocker): 70 करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड यूज़र्स और 850 करोड़ से अधिक डिजिटल डॉक्यूमेंट्स जारी किए जा चुके हैं।
ई-संजीवनी (eSanjeevani):
इस टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म के जरिए ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोग 48 करोड़ से अधिक बार मुफ्त ऑनलाइन डॉक्टर कंसल्टेशन ले चुके हैं।
मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग: 2014 के मुकाबले इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में भारी उछाल आया है और भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता देश बन चुका है। तो दूसरी तरफ नए भारत के पोर्न प्रवृति रुझानों में भी व्यापक बढ़त मिली हुई है।
इंटरनेट डेटा रिपोर्टों, वेब ट्रैफिक एनालिटिक्स और सर्च ट्रेंड्स के अनुसार, भारत में पोर्नोग्राफिक (वयस्क) सामग्री खोजने और देखने वालों की कुल संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसके तरीके और रुझान में बदलाव आया है।
इंटरनेट के प्रसार और वयस्कों की ऑनलाइन उपस्थिति के आधार पर स्थिति इस प्रकार है:
1. यूज़र्स की संख्या बढ़ी है (कुल वॉल्यूम)
स्मार्टफोन और सस्ते डेटा का असर: 2016-2017 में 4G क्रांति के बाद भारत में इंटरनेट यूज़र्स की संख्या 25 करोड़ से बढ़कर 100 करोड़ के पार पहुँची है। इसके साथ ही इंटरनेट पर वयस्क सामग्री की खोज करने वालों की कुल संख्या में भी वृद्धि हुई है।
मोबाइल ट्रैफिक में बढ़त: वैश्विक डेटा रिपोर्टों के अनुसार, भारत में अडल्ट वेबसाइट्स पर आने वाले 85% से 90% से अधिक यूज़र्स मोबाइल का उपयोग करते हैं।
ब्लॉक के बावजूद ट्रैफिक का दूसरा रास्ता
वेबसाइट बैन का प्रभाव: भारत सरकार द्वारा 800 से अधिक मुख्य पोर्नोग्राफिक वेबसाइटों पर प्रतिबंध लगाने के बावजूद खोज समाप्त नहीं हुई।
मिरर साइट्स और VPN: बैन के बाद लोग नए डोमेन (मिरर या प्रॉक्सी साइट्स), VPN (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) सेवाओं और सर्च इंजनों पर नए शब्दों (Keywords) के जरिए ऐसी सामग्री खोजते हैं।
वेब एनालिटिक्स डेटा: सिमिलरवेब (Similarweb) जैसी ट्रैफिक एनालिटिक्स एजेंसियों के अनुसार, भारत में शीर्ष 50 सबसे ज़्यादा विज़िट की जाने वाली वेबसाइटों में अक्सर कुछ अडल्ट-मिरर डोमेन/वेबसाइट्स शामिल रहती हैं।
3. खोज के तरीकों में बदलाव
सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर शिफ्ट: अब लोग सिर्फ सर्च इंजन या मुख्य वेबसाइट्स पर ही पोर्न नहीं खोजते, बल्कि टेलीग्राम ग्रुप्स, रेडिट और अन्य गुप्त मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए भी ऐसी सामग्री एक्सेस करते हैं।
निष्कर्ष:
सर्च इंजनों और अडल्ट साइट एनालिटिक्स के आंकड़े यही दर्शाते हैं कि इंटरनेट की पहुँच बढ़ने के कारण पोर्न खोजने और देखने वालों की संख्यात्मक (Absolute Numbers) वृद्धि हुई है, भले ही सरकारी बैन और नियमों के कारण खोज के तरीके बदल गए हों।कुल मिलाकर कहा जा सकता है नया भारत हर क्षेत्र में तेजी से बदल रहा है।