#04sep #28sep
चन्द्रशेखर दुबे
🎂04 सितम्बर 1924
⚰️ 28 सितम्बर 1993
जिन्हें आमतौर पर सी.एस. दुबे कहा जाता है , एक भारतीय अभिनेता और रेडियो व्यक्तित्व थे। उनका जन्म कन्नौद में हुआ था और उन्होंने 1950 के दशक में चरित्र अभिनेता के रूप में पतिता (1953) और मिस्टर एंड मिसेज '55 (1955) के साथ 150 से अधिक हिंदी फिल्मों में काम किया। वह फिल्म ज़िंदा दिल (1975) में अपने वन-लाइनर "धक्कन खोल के" के लिए प्रसिद्ध हुए, जिसे बाद में उन्होंने अपने रेडियो कार्यक्रमों में लगभग हर वाक्य के साथ प्रत्यय के रूप में इस्तेमाल किया।
दुबे भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय थे जिसके लिए उन्हें जेल में डाल दिया गया था।फिर वह एक अभिनेता के रूप में काम करने के लिए बंबई चले गए। उन्हें एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी जाना जाता था जो गरीब छात्रों को उनकी शिक्षा के लिए भुगतान करने में मदद करते थे।
उन्होंने सबसे पहले निर्माता और निर्देशक अमिया चक्रवर्ती की दो फिल्मों पतिता और सीमा (1955) में काम करने से पहले उनके लिए एक ऑफिस बॉय, प्रोडक्शन मैनेजर और सहायक निर्देशक के रूप में काम किया। उन्होंने तीसरी कसम , रोटी कपड़ा और मकान , मौसम , अंगूर और राम तेरी गंगा मैली जैसी लगभग 200 फिल्मों में काम किया । उन्हें ज्यादातर ऋणदाताओं, दलालों या बलात्कारियों जैसे नकारात्मक किरदारों को चित्रित करने के लिए जाना जाता था।
उन्होंने रेडियो के लिए काम किया और हवा महल , फौजी भाइयों जैसे रेडियो कार्यक्रमों और रेडियो नाटकों में अभिनय किया।
चंद्रशेखर दुबे (Chandrashekhar Dubey) को इंडस्ट्री में लोग प्यार से सीएस दुबे कहकर पुकारते थे. चंद्रेशखर एक एक्टर और अस्सिटेंट डायरेक्टर थे. अच्छी आवाज होने की वजह से वह रेडियो में भी काम करते थे. उनका जन्म मध्यप्रदेश के कन्नौद में हुआ था. कई रिपोर्ट्स में दावा में किया गया कि उन्होंने साल 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लिया और अंग्रेजों का विरोध किया. इसा दौरान उन्होंने गिरफ्तार भी किया गया. उस वक्त सीएस दुबे 18 साल के थे.
जब भारत आजाद हुआ था, तो उनपर घर संभालने की जिम्मेदारी आई. उन्होंने मुंबई का रुख किया और काम ढूंढ़ना शुरू किया. उन्हें बचपन से ही कलाकारी का शौक था. लेकिन मुंबई आकर वह कुछ और काम करना चाहते थे, लेकिन मुंबई आने पर उनकी मुलाकात उस दौर के मशहूर फिल्ममेकर अमिया चक्रवर्ती से मुलाकात हुई. अमिया ने उन्हें पहले ऑफिस बॉय और फिर प्रोडक्शन मैनेजर और अस्सिटेंट डायरेक्टर की नौकरी दी.
चंद्रेशखर दुबे ने 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया
इसके बाद चंद्रशेखर दुबे ने साल 1955 में ‘पतिता’ और ‘सीमा’ फिल्मों में किया. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. चंद्रशेखर रियल लाइफ में बिल्कुल साधारण और सज्जन पुरुष थे, लेकिन रील में उन्हें निर्दयी, खड़ूस, घमंडी जमींदार के किरदार मिले, जिसे लोगों ने काफी पसंद किया. उन्होंने ‘तीसरी कसम’, ‘मौसम’, ‘छोटी सी बात’, ‘राम तेरी गंगा मैली’ समेत लगभग 200 फिल्मों में काम किया.चंद्रेशखर दुबे ने हवा महल, फौजी भाइयों और कई रेडियो नाटक को अपनी आवाज दी और होस्टिंग की. उनके बेटे और एक बेटी हैं. चंद्रशेखर दुबे ने अपने जीवन के अंतिम दिनों तक फिल्मों में काम किया. 28 सितंबर 1993 को उनका निधन हो गया.
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यार मेरी जिंदगी (2008)
हत्या: (2004)
गैर (1999)
शेयर बाज़ार (1997)
सरहद: अपराध की सीमा (1995)
आतंक ही आतंक - (1995)
स्टंटमैन (1994)
ईना मीना डीका (1994)
शुरुआत (1993)
दलाल (1993)
धरतीपुत्र (1993)
अंतिम न्याय (1993)
नसीबवाला (1992)
नरसिंह (1991)
इरादा (1991)
विद्रोही - (1990)
करिश्मा काली का (1990)
आग का गोला (1990)
घर हो तो ऐसा (1990)
सैलाब (1990)
जीवन एक संघर्ष (1990)
उस्ताद (1989)
डेव पेच (1989)
निशाने बाज़ी (1989)
बड़े घर की बेटी (1989)
तूफ़ान - (1989)
जादूगर - (1989)
गलियों का बादशाह (1989)
क्लर्क (1989)
औरत तेरी यही कहानी (1988)
जीते हैं शान से (1988)
ज़लज़ला (1988)
नया रिश्ता (1988)
ज़ख्मी औरत (1988)
सूरमा भोपाली (1988)
हम फरिश्ते नहीं (1988)
आक्रांत (1988)
रात के अँधेरे में (1987)
डाकू हसीना (1987)
मार्टे डैम तक (1987)
बेसहारा (1987)
कुदरत का कानून (1987)
ठिकाना - (1987)
कलयुग और रामायण (1987)
नज़राना (1987)
राज दुलारा (1987)
माँ बेटी (1986)
अँधेरी रात में दिया तेरे हाथ में (1986)
सवेरे वाली गाड़ी (1986)
घर संसार (1986)
कर्म (1986)
किरायदार (1986)
काला ढांडा गोरे लोग (1986)
आप के साथ (1986)
पिया मिलन (1985)
एक चिट्ठी प्यार भारी (1985)
हकीकत (1985)
फाँसी के बाद (1985)
घर द्वार (1985)
मर्द (1985)
राम तेरी गंगा मैली (1985)
जिंदगी जीने के लिए (1984)
एक नया इतिहास (1984)
ये देश (1984)
ग्रहस्थी (1984)
कानून क्या करेगा (1984)
लव मैरिज (1984)
करिश्मा (1984)
राम की गंगा (1984)
गंगवा (1984)
एक नई पहेली (1984)
शराबी (1984)
भेमा (1984)
मकसद (1984)
इंकलाब (1984)
निशान (1983)
फ़रीब (1983)
हम से है जमाना (1983)
मंजू (1983)
कुली (1983)
पेंटर बाबू (1983)
तक़दीर (1983)
कालका (1983 फ़िल्म)
तेरी मांग सितारों से भर दूं (1982)
धरम कांटा (1982)
तीसरी आंख (1982)
अपना बना लो (1982)
अंगूर (1982)
शीतला माता (1981)
फिफ्टी फिफ्टी (1981)
श्रद्धांजलि (1981)
खुदा कसम (1981)
हक़दार (1981)
रॉकी (1981)
क्रोधी (1981)
बुलुंडी (1981)
मान अभिमान (1980)
पतिता (1980)
पायल की झंकार (1980)
बिन माँ के बच्चे (1980)
हम पाँच (1980)
बे-रहाम (1980)
दो प्रेमि (1980)
नागिन और सुहागन (1979)
मेरी बीवी की शादी (1979)
सलाम मेमसाब (1979)
नैय्या (1979)
घर की लाज (1979)
सांच को आंच नहीं (1979)
मंज़िल (1979)
बिन फेरे हम तेरे (1979)
त्याग पत्र (1978)
चोर हो तो ऐसा (1978)
दामाद (1978)
राहु केतु (1978)
राम कसम (1978)
घर (1978)
काला आदमी (1978)
चक्रव्यूह (1978 फ़िल्म) 1978
मैं तुलसी तेरे आँगन की (1978)
आज़ाद (1978)
शिरडी के साईं बाबा(1977)
आनंद आश्रम(1977)
टिंकू (1977)
ड्रीम गर्ल (1977)
खेल खिलाड़ी का (1977)
इम्मान धरम (1977)
लगाम (1976)
तपस्या (1976)
चितचोर (1976)
दस नम्बरी (1976)
छोटी सी बात (1976)
एक गाँव की कहानी (1975)
ज़िंदा दिल (1975)
सन्यासी (1975)
मौसम (1975)
आंधी (1975)
द चीट(1974)
रोटी कपड़ा और मकान (1974)
इम्तिहान (1974)
मेरे ग़रीब नवाज़ (1973)
सौदागर (1973)
बनारसी बाबू (1973)
एक खिलाड़ी बावन पत्ते (1972)
राजा जानी (1972)
समाधि (1972)
राखी और हथकड़ी (1972)
शादी के बाद (1972)
बाबुल की गलियाँ (1972)
अपना देश (1972)
संजोग (1972)
पिया का घर (1972)
लगान (1971)
मैं सुन्दर हूँ (1971)
बिखरे मोती (1971)
समाज को बदल डालो (1970)
पगला कहीं का (1970)
पहचान (1970)
हमजोली (1970)
यादगार (1970)
तुम हसीन मैं जवान (1970)
खिलोना (1970)
दो भाई (1969)
जीने की राह (1969)
प्रिंस (1969)
आराधना (1969)
झुक गया आसमान (1968)
सपनों का सौदागर (1968)
तीसरी कसम (1966)
गबन (1966)
आये दिन बहार के (1966)
गोस्वामी तुलसीदास (1964)
बिदेसिया (1963)
बिन बादल बरसात (1963)
आरती (1962)
हमारी याद आएगी (1961)
पासपोर्ट (1961)
रामू दादा (1961)
अर्धांगिनी (1959)
हरिया (1958)
देख कबीरा रोया (1957)
भाभी (1957)
अब दिल्ली दूर नहीं (1957)
कठ पुतली (1957)
जलदीप (1956)
सीमा (1955)
पहली झलक (1955)
मिस्टर एंड मिसेज '55 (1955)
पतिता (1953)
दाग (1952)
सुनहरे दिन / गीत "हम मस्त दिलों को लेकर" में कैमियो उपस्थिति/(1949)
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