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Sunday, August 4, 2024

शकीला

#01jan 
#20sep 
शकीला
🎂01 जनवरी 1935
अफ़ग़ानिस्तान
⚰️20 सितंबर 2017 (आयु 82)
मुंबई , महाराष्ट्र , भारत
राष्ट्रीयता
भारतीय
पेशा
अभिनेत्री
सक्रिय वर्ष
1949–1963
उल्लेखनीय कार्य
आर पार (1954)
सीआईडी ​​(1956)
चाइना टाउन (1962)
जीवनसाथी
वाईएम एलियास
(विवाह 1963)
रिश्तेदार
जॉनी वॉकर (साला)
हिन्दी सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्री शकीला की छोटी बहन नूर भी अभिनेत्री थीं। उनकी सबसे छोटी बहन ग़ज़ाला (नसरीन) साधारण गृहणी थीं। शकीला जी के पिता का जल्द ही निधन हो गया था, उनकी बुआ फ़िरोज़ा बेगम ने उनका तथा बहनों का पालन-पोषण किया था।अभिनेत्री शकीला का वास्तविक नाम 'बादशाहजहाँ' था। शकीला जी के अनुसार- "मेरे पूर्वज अफ़ग़ानिस्तान और ईरान के शाही खानदान से ताल्लुक रखते थे। मेरा जन्म 1 जनवरी, 1936 को मध्यपूर्व में हुआ था। राजगद्दी पर कब्ज़े के खानदानी झगड़ों में मेरे दादा-दादी और मां मारे गए थे। मैं तीन बहनों में सबसे बड़ी थी और हम तीनों बच्चियों को साथ लेकर मेरे पिता और बुआ जान बचाकर मुम्बई भाग आए थे। उस वक़्त मैं क़रीब 4 साल की थी।"

शकीला जी के मुताबिक़ उनके पिता भी बहुत जल्द गुज़र गए थे। उनकी बुआ फ़िरोज़ा बेगम का रिश्ता शहज़ाद नाम के जिस युवक से हुआ था, वह भी नवाब खानदान के थे। लेकिन शादी होने से पहले ही लन्दन में क्रिकेट खेलते समय उनका निधन हो गया था। ऐसे में बुआ ने ज़िंदगी भर अविवाहित रहने का फ़ैसला कर लिया। तीनों अनाथ भतीजियों का पालन पोषण बुआ ने ही किया। इन तीनों की पढ़ाई-लिखाई भी घर पर ही हुई।
शकीला जी के अनुसार- "बुआ को फिल्में देखने का बहुत शौक़ था। वह मुझे साथ लेकर फ़िल्म देखने जाती थीं। ऐसे में मेरा रूझान भी फ़िल्मों की ओर होने लगा। कारदार और महबूब के साथ हमारे पारिवारिक सम्बन्ध थे। ईद पर हमारा मिलना-जुलना और एक-दूसरे के घर आना-जाना होता ही था। कारदार ने ही मुझे फ़िल्म ‘दास्तान’ में एक 13-14 साल की लड़की का रोल करने को कहा था और इस तरह साल 1950 में प्रदर्शित हुई फिल्म ‘दास्तान’ से मेरे अभिनय कॅरियर की शुरुआत हुई। इसी फिल्म में मुझे मेरे असली नाम 'बादशाहजहां' की जगह ये फ़िल्मी नाम 'शकीला' मिला था।"
शकीला जी के अनुसार- "साल 1966 में मेरी शादी हुई। मेरे शौहर अफ़ग़ानिस्तान के रहने वाले थे और भारत में अफ़ग़ानिस्तान के ‘कांसुलेट जनरल’ थे। शादी के बाद मैं शौहर के साथ जर्मनी चली गयी। क़रीब 25 साल मैंने जर्मनी और अमेरिका में बिताए। बीचबीच में मैं भारत आती-जाती रहती थी, जहां मेरा घर था, मेरी बहनें रहती थीं। फिर निजी वजहों से एक रोज़ मैं हमेशा के लिए भारत वापस लौट आयी।"

तीनों बहनों में शकीला जी से छोटी नूर भी अभिनेत्री थीं। ‘अनमोल घड़ी’ (1946) और ‘दर्द’ (1947) जैसी फ़िल्मों में बतौर बाल कलाकार काम करने के बाद वह ‘दो बीघा ज़मीन’, ‘अलिफ़ लैला’ (दोनों 1953), ‘नौकरी’ और ‘आरपार’ (दोनों 1954) जैसी फ़िल्मों में अहम भूमिकाओं में नज़र आयीं। 1955 में हास्य कलाकार जॉनी वॉकर से शादी करने के बाद उन्होंने फ़िल्मों को अलविदा कह दिया था। शकीला जी की सबसे छोटी बहन ग़ज़ाला (नसरीन) एक गृहिणी हैं। नूर और नसरीन भी मुम्बई में ही रहती हैं। शकीला जी को फिल्मों से अलग हुए कई साल हो चुके हैं, लेकिन बीते दौर की अभिनेत्रियों जबीन, श्यामा, अज़रा, वहीदा रहमान और (स्वर्गीय) नंदा से उनकी दोस्ती हमेशा बनी रही।
🎥
1949 दुनिया
1950 दास्तान
1953 अरमान
1953 मैडमस्ट
1953 शहंशाह
1953 आघोष
1954 आर पार - डांसर
1954 दान
1954 गुल बहार
1954 हल्ला गुल्ला
1954 खुशबू
1954 लैला
1954 लाल परी
1954 अली बाबा 40 चोर - मरजीना
1954 नूर महल
1955 मस्त कलंदर
1955 रत्न मंजरी
1956 सीआईडी ​​- रेखा
1956 कारवां
1956 हातिम ताई
1956 झांसी की रानी - काशी
1956 मलिका
1956 पैसा ही पैसा
1956 रूप कुमारी
1957 बेगुनाह
1957 नाग पद्मिनी
1957 परिस्तान
1957 आगरा रोड
1958 अल हिलाल
1958 चौबीस घंटे
1958 पोस्ट बॉक्स 999 - नीलिमा
1959 चालीस दिन
1959 गेस्ट हाउस - नीला
1959 काली टोपी लाल रुमाल - चंपा
1959 स्कूल मास्टर
1960 अब्दुल्ला
1960 बारात
1960 डॉ. शैतान
1960 जुआरी
1960 श्रीमन् सत्यवादी -गीता
1961 रेशमी रुमाल - रेखा राय
1962 बगदाद की रातें
1962 चाइना टाउन - रीता डी. राय
1962 नकली नवाब - शबनम
1962 टावर हाउस - सबिता
1962 नीली आंखें
1963 कहीं प्यार ना हो जाए - बिमला
1963 मुल्ज़िम - आशा
1963 उस्तादों के उस्ताद - नीता

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