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Thursday, September 12, 2024

रंजन

#12sep #02march 
रामनारायण वेंकटरमण सरमा(रंजन)
02 मार्च 1918
मद्रास , ब्रिटिश भारत
12 सितम्बर 1983 
(आयु 65)
न्यू जर्सी , संयुक्त राज्य अमेरिका
सक्रिय वर्ष
1941–1959
जीवनसाथी
कमला
रंजन  प्रसिद्ध अभिनेता, गायक, पत्रकार और लेखक थे।
उनके भाई आरआर सरमा, जो एक आर्किटेक्ट हैं, जिन्होंने मुंबई में जेजे स्कूल ऑफ आर्ट्स से स्नातक किया, ने टीवीएस और मुरुगप्पा समूहों के लिए कई प्रोजेक्ट डिजाइन किए और अपनी पत्नी के भाई शिवकुमार को पल्लिक्करनई में एक आवास परियोजना के लिए संयुक्त राष्ट्र के एक विशेषज्ञ के साथ सहयोग किया। आरआर सरमा, जिनकी फर्म उनके जीवनकाल के बाद जारी नहीं रही, ने स्पष्ट रूप से व्यक्त किया कि उद्योग में क्या समस्या थी। उन्होंने कहा था, "मद्रास में घरों को डिजाइन करना कमर तोड़ने वाला और निराशाजनक है।" उन्होंने यह सब अपने कदमों में लिया और भव्य मद्रास विश्वविद्यालय शताब्दी सभागार, आलीशान आरबीआई कार्यालय, अन्ना सलाई पर विक्टोरिया तकनीकी संस्थान और तारामणि में स्वैच्छिक स्वास्थ्य सेवाएं बनाईं।
उनका परिवार श्रीरंगम, तमिलनाडु का रहने वाला था। वह अपने पिता आर.एन. शर्मा की दस संतानों में चौथी संतान थे। उन्होंने मद्रास स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा प्राप्त की और 1938 में भौतिक विज्ञान में स्नातक की डिग्री पाई। वह अपने कॉलेज के दिनों से ही नाटकों में अभिनय करते थे।

रंजन का विवाह मुस्लिम महिला लक्ष्मी के साथ हुआ, लेकिन उन्होंने पूरा परिवार हिन्दू रीति-रिवाजों के साथ चलाया। रंजन को पढ़ाने का बहुत शौक था। मौका मिलते ही वह यूरोप और अमेरिका के विश्वविद्यालयों में फ़िल्म के विषय पर लेक्चर देने जाते रहते थे। संगीत पर उन्होंने मद्रास यूनिवर्सिटी की फेलोशिप पर शोधकार्य किया। समर स्कूल में उन्होंने संगीत-नृत्य सिखाया और शानदार होटल चलाया।

फ़िल्मी_शुरुआत

रंजन ने अपने फ़िल्मी कॅरियर की शुरुआत 1941 में फ़िल्म 'अशोक कुमार' से की थी। उनके फ़िल्मकार मित्र आचार्य ने उनके आकर्षक व्यक्तित्व को देखकर अपनी फ़िल्म 'दिव्य सिंगार' में नायक की भूमिका दी, जिसमें हिरोइन वैजयंती माला की मां वसुंधरा थीं। इसके बाद उनकी फ़िल्म 'नारद' रिलीज हुई, जिसमें कथकली और भरतनाट्यम के कई दृश्य थे। उनकी फ़िल्म 'चंद्रलेखा' अपने दौर की सबसे महंगी फ़िल्म थी। उत्तर भारत में प्रदर्शित होने वाली दक्षिण भारत की यह पहली फ़िल्म थी, जिसे दर्शकों की जबरदस्त प्रतिक्रियाएँ मिलीं। तमिल के बाद इसके हिन्दी संस्करण को लेकर रंजन बॉलीवुड आए।

विशेष

तमिल सिनेमा का सुपर स्टार बनने पर उन्होंने टाइगर माउथ विमान खरीद लिया और अपने शूटिंग लोकेशन पर वह हवाई जहाज़ उड़ाकर जाते थे। वह पहले अभिनेता थे, जिन्होंने रॉल्स रॉयस कार खरीदी थी। इसके अलावा वह पहले अभिनेता थे, जिन्होंने फ़िल्म में विग का इस्तेमाल किया। जेमिनी के. एस. एस. वासन ने अपनी फ़िल्म चंद्रलेखा में रंजन को तमिल-हिन्दी संस्करण का नायक बनाया। उसी दौरान रंजन ने अपने बाल कटवा दिए, जिससे वासन बहुत नाराज़ हुए। इस पर रंजन ने उन्हें विग लगाने का सुझाव दिया। चंद्रलेखा का भव्य नगाड़ा डांस दर्शक आज भी नहीं भूले हैं। इसकी परिकल्पना और कोरियोग्राफी रंजन ने ही की थी।

प्रतिभावान

रंजन को उनके पिता संगीतज्ञ बनाना चाहते थे। इसलिए उन्होंने रंजन को स्कूल भेजने के बजाय सात साल की उम्र में वॉयलिन सीखने के लिए भेज दिया। जब उनके पिता को समझाया गया कि बच्चे को औपचारिक शिक्षा दिलाना ज़रूरी है। तब उन्होंने इस शर्त के साथ उन्हें स्कूल जाने की अनुमति दी कि वह दिन में स्कूल जाएं, लेकिन स्कूल से लौटने के बाद आठ घंटे तक वॉयलिन का अभ्यास करें। यह सब करते हुए रात के दो बज जाते थे और रंजन तीन-चार घंटे ही सो पाते थे।

रंजन हिन्दुस्तानी और पाश्चात्य संगीत के मर्मज्ञ होने के साथ ही कथकली तथा भरतनाट्यम नृत्य में भी निपुण थे और तलवारबाज़ी में पारंगत थे। फ़िल्मों में उनके तलवारबाज़ी के दृश्य हैरतअंगेज हुआ करते थे। विभिन्न विषयों में रंजन की निपुणता यहीं तक सीमित नहीं थी। वह सभी भारतीय भाषाएं बोलने, लिखने और पढ़ने में सिद्धहस्त थे। उन्हें चित्रकारी का भी शौक था और फुर्सत के क्षणों में उन्होंने जादू की कला भी सीखी। उन्होंने अंग्रेज़ी-तमिल नाट्य पत्रिका का सम्पादन किया था। रंजन ने हवाई जहाज़ उड़ाना भी सीखा।
रंजन की मृत्यु 12 सितम्बर 1983 को न्यू जर्सी के एक होटल में हृदयाघात से हो गयी । उस समय उनकी आयु 65 वर्ष थी।
🎥
1941) अशोक कुमार
(1943) मंगम्मा सपथम
(1945) सालिवाहनन
(1948) चंद्रलेखा
(1949) निशान /  हिंदी संस्करण
(1950) मंगला
(1952) शिन शिनाकी बूबला बू
(1954) मिन्नल वीरन
(1957) नीलामलाई थिरुदन
(1958) हम भी कुछ कम नहीं
(1959) मदारी
(1960) एयर मेल
(1961) सपेरा
(1961) जादू नगरी
(1961) खिलाड़ी
(1962) "सखी रॉबिन"
(1965) दुर्घटना
(1969) कैप्टन रंजन (तमिल - 1960 में निर्मित लेकिन 1969 में रिलीज़)

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