#19sep
सुनील सिकंद
स्क्रीन नाम सुनील सिकंद
के रूप में जन्मे सुनील सिकंद
पेशा फ़िल्म निर्देशक
🎂जन्म 19 सितंबर 1949
जन्म (शहर) बम्बई (अब मुंबई), महाराष्ट्र
जन्म (देश) भारत
राष्ट्रीयता भारतीय
पिता प्राण
(अभिनेता)
माँ शुक्ल शिखंड
पति-पत्नी
अलग हो गए ज्योति सिकंद
स्क्रीन नाम सुनील सिकंद
के रूप में जन्मे सुनील सिकंद
पेशा फ़िल्म निर्देशक
🎂जन्म 19 सितंबर 1949
जन्म (शहर) बम्बई (अब मुंबई), महाराष्ट्र
जन्म (देश) भारत
राष्ट्रीयता भारतीय
पिता प्राण
(अभिनेता)
माँ शुक्ल शिखंड
पति-पत्नी
अलग हो गए ज्योति सिकंद
सुनील सिकंद अहलूवालिया एक भारतीय फिल्म निर्देशक और अनुभवी अभिनेता प्राण के बेटे हैं। उन्होंने अपनी पहली फिल्म 1984 में फरिश्ता और दूसरी फिल्म 1991 में लक्ष्मणरेखा निर्देशित की, जिसमें जैकी श्रॉफ, नसीरुद्दीन शाह, शम्मी कपूर, डैनी डेन्जोंगपा और उनके पिता प्राण ने अभिनय किया था।
बाप की तरह विलेन ना बन पाया, लेकिन एड की दुनिया का बेताज बादशाह है प्राण का ये बेटा
अगर बाप बड़ा स्टार है तो बेटा भी उतना ही बड़ा एक्टर बने...और फिर ये भी जरूरी नहीं कि बेटा भी बाप की तरह ही एक्टर बने।प्राण के दो बेटे और एक बेटी हैं। उन्हीं में से एक हैं सुनील सिकंद। सुनील काफी मशहूर एड फिल्ममेकर हैं। सुनील को पिता से एक्टिंग विरासत में मिली थी। वो चाहते तो एक्टिंग में ही करियर बना सकते थे। पिता के रसूख के बल पर उन्हें अच्छी-खासी फिल्में भी मिल जातीं, लेकिन सुनील शायद अपने दम पर ही कुछ करना चाहते थे।कुछ ऐसा जिससे ना सिर्फ उन्हें खुद पर गर्व हो बल्कि उनके पिता को भी गर्व हो कि उनके बेटे ने एक्टिंग से इतर किसी और फील्ड में उनका नाम रोशन किया है। सुनील इसमें कामयाब हो भी गए।
आज वो इंडिया के टॉप एड फिल्मफेकर्स में से एक हैं जिनकी तूती बोलती है। सुनील सिकंद आलिया भट्ट से लेकर श्रद्धा कपूर तक कई टॉप स्टार्स के साथ सक्सेसफुल विज्ञापन बना चुके हैं। इसके अलावा वो कई और विज्ञापन बना चुके हैं जिनमें कोल्ड ड्रिंक से लेकर गाड़ियां भी शामिल हैं।सुनील के लिए इससे बड़ी उप्लब्धि और क्या होगी कि उन्हें ब्रिटिश सिंगर डीडो ने अपने लिए एक वीडियो डायरेक्ट करने के लिए साइन किया। इस वीडियो के लिए इंडिया से पांच मशहूर निर्देशकों को चयन हुआ था लेकिन उनमें डीडो को सुनील का आइडिया पसंद आया।
बचपन से सुनील फिल्मों को लेकर पागल थे, खासकर पिता प्राण और अमिताभ बच्चन की फिल्मों को लेकर। अमिताभ और प्राण की 'अमर अकबर एंथोनी' तो सिद्धार्थ ने करीब 19 बार देखी।
धीरे-धीरे जैसे बड़े हुए तो सुनील को अहसास हुआ फिल्में उनकी दुनिया नहीं हैं। अब उन्हें एड फिल्में अच्छी लगने लगीं थीं। 2002 में सुनील ने अपने दोस्त के एक बैंड के लिए म्यूजिक वीडियो बनाया जिसे काफी पसंद किया गया।
इसके बाद उन्होंने एक एंटरटेनमेंट चैनल के लिए काम किया जिसमें वो ना सिर्फ प्रोमो हैड थे बल्कि लिखते और एडिटिंग भी करते थे।आजकल सुनील बूटपॉलिश डॉट कॉम के लिए एड डायरेक्ट करते हैं। उनके डायरेक्ट किए कुछ विज्ञापनों को अवॉर्ड्स तक मिल चुके हैं। उनकी एक फिल्म नेशनल ज्योग्राफिक चैनल का हिस्सा थी और इसे 2013 में एबी अवॉर्ड्स में सिल्वर मेडल मिला।
इसके बाद उन्होंने एक एंटरटेनमेंट चैनल के लिए काम किया जिसमें वो ना सिर्फ प्रोमो हैड थे बल्कि लिखते और एडिटिंग भी करते थे।आजकल सुनील बूटपॉलिश डॉट कॉम के लिए एड डायरेक्ट करते हैं। उनके डायरेक्ट किए कुछ विज्ञापनों को अवॉर्ड्स तक मिल चुके हैं। उनकी एक फिल्म नेशनल ज्योग्राफिक चैनल का हिस्सा थी और इसे 2013 में एबी अवॉर्ड्स में सिल्वर मेडल मिला।
आज प्राण भले ही इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन अपने बेटे की इस कामयाबी पर उन्हें फक्र जरूर महसूस होता होगा
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1977 धरम वीर
1977 परवरिश
1979 सुहाग
1984 फरिश्ता
1991 लक्ष्मणरेखा
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